कोरोना नहीं, लेकिन भूख जरूर मार देगी! पढ़िए भूख से तड़पने वाले परिवारों की कहानी, कैसे गुजार रहे दिन.......
परिवार के कमाऊ सदस्य लॉक डाउन के कारण ईट भठ्ठे पर फंसे
जनसंदेश न्यूज़
बड़ागांव। कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में 21 दिनों तक के लिए लॉक डाउन कर दिया गया है। वायरस के संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए उठाये गये इस कदम के कारण कई गरीबों के सामने भूखे पेट सोने की समस्या आ गई है। आलम यह है कि लॉक डाउन के कारण वें कहीं भी जा नहीं पा रहे, उनके सामने आजिविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
बड़ागांव के कोइरीपुर मुसहर बस्ती में एक 17 परिवार निवास करता है। जिसमें पांच परिवार सदस्य ईट भट्ठा पर ईट पथाई कार्य करते है, जिससे उनके परिवार की आजिविका चलती है। लॉक डाउन के बाद से वें वहीं फंस गये। इधर उनके परिवार के सदस्यों की जिंदगी लॉक डाउन से बेपटरी हो गई है।
बीते 23 मार्च को बस्ती में चंद्रावती, पूजा, सोनू, मुसहर, नंदा, चंपा, अनीता, गुड्डू मुसहर, भोनू मुसहर, चमोल, पिंटू मुसहर, मंगरु मुसहर, सरोजा, कल्लू मुसहर, दशरथी, राहुल मुसहर दिन भर भूखे रहे। देर शाम को बच्चे बगल के गांव में तेरहवीं का खाना खाकर बचा हुआ खाना घर लाये। जिसको घर के अन्य महिला पुरूष खाना खाकर पेट भरा।
लेकिन 24 मार्च को पुनः वहीं समस्या पूरा परिवार दिन में भूखा रहा। दोपहर में खेतों से बीना हुआ आलू उबालकर सभी बच्चे और महिला पुरुष खाए और एक टकटकी लगाकर पूरा दिन खाने का इंतजार करते रहे। मगर खाना नहीं मिला।
आज सुबह मुसहर बस्ती के बच्चे रानी, सीमा, सुरेंद्र, पूजा, विशाल, आरती, निरहु, अर्जुन, चांदनी, सोनी, निशा, गोलू आदि भूख से बेहाल होने लगे तो बगल के खेतों में अपना भूख मिटाने के लिए गेहूं के खेत में लगे घास (अकरी) को उखाड़ कर उसके दाने से अपनी भूख शांत कर रहे है। दूसरी तरफ आसपास के लोग कोरोना के भय के कारण उक्त परिवार की मदद करने के लिए नहीं पहुंच रहे है।