कोरोना आतंक: मेडिकल की पढ़ाई कर रहे अर्मेनिया में फंसे सैकड़ों भारतीय छात्र, वतन वापसी का इंतजार
दुद्धी की दो सगी बहनों के साथ एक छात्र भी ले रहा मेडिकल की तालीम
ढाई सौ छात्रों के समूह के साथ दुद्धी की दो बेटियां गुरुवार को विशेष विमान पर होंगी सवार
जनसंदेश न्यूज़
दुद्धी/सोनभद्र।
रोज दो नफ़्ल मैं शुकराना अदा करती हूं,
बच्चे स्कूल से जब लौट के घर आते हैं।
जी हां, ये उन मांओं की हालाते हाजरा है, जिनके बच्चे डॉक्टरी की तालीम हासिल करने घर से हजारों मील दूर सात समंदर पार गए हैं। कॅरोना जैसी खतरनाक बीमारी से महफूज़ रखने व अपने बच्चों की वतन वापसी की आस संजोए माँ सहित घर के सदस्य दिन-रात दुआ में लीन हैं। कोरोना का आतंक समूचे विश्व को अपने आगोश में ले लिया है। यूरोप में महज तीस लाख की आबादी वाले अर्मीनिया देश में पांच सौ से अधिक कोरोना की रोगी मिलने से वहां इमरजेंसी जैसे हालात उत्पन्न हो गये है। उस देश की राजधानी येरेवान में स्थित येरीवान स्टेट मेडिकल गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी बंद होने से वहां चौबीस सौ से अधिक विद्यार्थी फंसे हुए है।
अर्मेनिया से सभी उड़ान भी रद्द कर दिया गया है। सुरक्षित अपने वतन लौटने के लिए बच्चों द्वारा भारतीय दूतावास का दरवाजा खटखटा रहे है, किन्तु उन्हें कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। जिससे भारतीय अभिभावकों में बेचौनी बढ़ी हुई है। इन सब के बीच बुधवार की देर शाम राहत वाली खबर यह आई कि गुरूवार को येरेवान से वाया मास्को होते हुए एक विशेष विमान भारत के लिए उड़ान भरेगा। उसमें वाईएसएम यूनिवर्सिटी के दो सौ पचास बच्चों के समूह को वतन वापसी की व्यवस्था बनाई गई है। जिसमें दुद्धी की दो बेटियां भी शामिल है।
दुद्धी जामा मस्जिद के सदर मुहम्मद शमीम अंसारी की दो बेटिया अर्मीनिया में येरेवान शहर के विश्व विद्यालय में मेडिकल स्टूडेंट के रूप में अध्यनरत है। इसके अलावा अम्बिकापुर निवासिनी उनकी भांजी डॉ फलक अंसारी व स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात वरिष्ठ फार्मासिस्ट सीपी सोनी का छोटा पुत्र डॉ अभिषेक सोनी भी उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। बीते सप्ताह वहां से आये एक फोन काल ने परिजनों की चिंता बढ़ा दी।
बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पढाई एवं परीक्षाएं स्थगित करते हुए अग्रिम आदेश तक विश्वविद्यालय बंद करते हुए सभी विद्यार्थियों को अपने वतन लौटने का फरमान सुना दिया। इससे अन्य देशों के साथ चौबीस सौ अधिक भारतीय बच्चों में भी अफरा-तफरी मच गई। मेडिकल कोर्स की फाइनल इयर की छात्रा डा. ऐमन अंसारी ने दूरभाष पर बताया कि अर्मीनिया सरकार ने लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर रोक लगा दी है। जिससे डॉक्टरी की तालीम हासिल के रहे भारतीय छात्र-छात्राओं की मुसीबत और बढ़ गई है।
एक राहत की खबर यह बताई कि उसके साथ उसकी छोटी बहन डॉ एरम अंसारी की भी 19 मार्च को चलने वाली विशेष विमान की टिकट कन्फर्म हो गई है। डॉ फलक और डॉ अभिषेक सोनी 20 मार्च को दूसरी फ्लाइट पकड़ेंगे। 19 मार्च को ढाई सौ बच्चों को लेकर एक सीधी विमान गुरूवार को येरेवान उड़ान भरेगी। जो वाया मास्को होते हुए दिल्ली शुक्रवार को तड़के पहुंचेगी। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाकायदा उनकी जांच कर उन्हें अपने-अपने गंतव्य को रवाना होने की इजाज़त दी जाएगी। राहत भरी खबर मिलने के बाद परिजनों को अब उनके बेसब्री से सुरक्षित वतन वापसी का इन्तजार कर रहे है।