बनारस में पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर स्थित इस गांव में मिला 1800 साल पुराना शिव मंदिर
जनसंदेश न्यूज़
वाराणसी। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर स्थित बभनियांव गांव में पिछले कई दिनों खुदाई कार्य चल रहा है। उत्खनन के नौवें दिन गुरुवार को करीब 1800 साल पुराने भगवान शिव के मंदिर का पूरा स्वरूप सामने आया है। इसकी सूचना लगते ही मौके पर भारी भीड़ जुट गई।
उत्खनन के दौरान मिले शिव मंदिर में एकमुखी शिवलिंग के बाद गर्भगृह, प्रदक्षिण पथ, पत्थर का बना अरघा और पानी निकलने की जगह भी मिलने से आरंभिक गुप्तकाल दौर के पुरावशेषों में यह मंदिर भी शामिल हो गया है। उत्खनन दल के सह निदेशक प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि शिवलिंग बकायदा अरघे में स्थापित है। यहीं नहीं शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल की निकासी का रास्ता भी बना हुआ है। सह निदेशक के अनुसार आसपास अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों का समूह होने का अनुमान है। इसके लिए बगल में एक और ट्रेंच में खोदाई शुरू की गई है।
बता दें कि बभनियांव में उत्खनन के दौरान पहली ट्रेंच में एकमुखी शिवलिंग तो तीन दिन पहले ही दिखाई पड़ा था। और अब गर्भ गृह के साथ अरघा आदि भी मिलने से पुरातत्वविद खासे उत्साहित हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक आरंभिक गुप्तकाल के मंदिरों की खासियत थी। उसमें शिखर नहीं होता था। बभनियांव में मिले मंदिर ने भी इसकी पुष्टि की है।
गांव में खुदाई के दौरान 1800 साल पुराना शिव मंदिर की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह भी गांव पहुंचे। उन्होंने वें पुरातात्विक कार्य व गांव के पर्यटन विकास में अनुदान के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे। इसके साथ ही वें अपने स्तर से भी बीएचयू के पुरातत्व विभाग को हर संभव मदद करने की बात कही। बताया कि यह गांव जल्द ही पर्यटक स्थल के रूप में तब्दील होगा।