अवैध वसूली में लिप्त कारखास की जांच करेगी एडीजी की स्पेशल टीम, हो सकती है बड़ी कार्रवाई
कारखास सिपाहियों के निलंबन व कई पुलिस कर्मियों की हो सकती है बर्खास्तगी
जनसंदेश न्यूज़
कौशांबी। जिले में संगठित अपराधों से अवैध वसूली का पुलिसिया खेल बहुत पुराना है। कोतवाली और थानों में पुलिस की वसूली के लिए कारखास सिपाहियों की ड्यूटी लगाई जाती है, जो अवैध धंधे में लगे लोगों की लिस्ट बनाकर बीच सड़क पर अवैध वसूली करते प्रतिदिन देखे जाते हैं। सूत्रों की मानें तो जिले के विभिन्न थाना चौकियों में प्रतिदिन लाखों रुपए की वसूली कारखास सिपाहियों द्वारा कोतवाल और थानेदारों के संरक्षण में की जा रही है।
जिले के यमुना नदी के बालू घाटों से बालू लेकर निकलने वाले ट्रक और ट्रैक्टर से भी पुलिस की अवैध वसूली बड़ी तेजी से बीते कई सालों से शुरू है। इस काम के लिए भी कुछ कारखास सिपाहियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनका संपर्क क्षेत्राधिकारी कार्यालय में भी देखा जाता है।
अवैध वसूली के मामले में महेवा घाट, पश्चिम शरीरा, कौशांबी, सराय, अकिल थाना के साथ-साथ चरवा, कोखराज, मंझनपुर, सैनी, पूरामुफ्ती, करारी, पिपरी थाना के कोतवाल और थानेदारों की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस मामले की जानकारी जैसे ही अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज ज़ोन को मिली। उन्होंने संगठित अपराधों से अवैध वसूली के मामले को गंभीरता से लिया और स्पेशल टीम का गठन कर संगठित अपराध से संबंधित थानेदारों कोतवालों को चिन्हित कर कार्यवाही का निर्देश दिया है।
अब सवाल यह उठता है कि अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित की गई स्पेशल टीम क्या जिले में हो रहे संगठित अपराधों से अवैध वसूली के जिम्मेदारों को चिन्हित कर उन्हें बेनकाब करते हुए अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट अपर पुलिस महानिदेशक को सौंपेगी या फिर पुलिस महकमे के बढ़ते भ्रष्टाचार में वह भी अपना हिसाब वसूल कर अपर पुलिस महानिदेशक को गुमराह करने तक सीमित रहेगी।
योगीराज में पुलिसिया व्यवस्था पर यह बड़ा सवाल है। लेकिन अब सवाल उठता है कि अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित की गई स्पेशल टीम ने अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच अधिकारी को सौंप दी, तो जिले के दो तिहाई थानेदार और कोतवाल का पैदल होना तय है। इतना ही नहीं इन थानेदारों के निलम्बन के साथ बर्खास्तगी और कारखास सिपाहियों का निलंबन के साथ-साथ पुलिस महकमे से बर्खास्तगी भी हो सकती है।