व्यवसायीकरण की भेंट न चढ़े शिक्षा और संस्कार


रवि प्रकाश सिंह 
-काशी विद्यापीठ में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोली राज्यमंत्री नीलिमा कटियार
रोजगार से जोड़ेगा नई शिक्षा नीति, स्नातक छात्रों को अंतिम छह माह व्यवसायिक प्रशिक्षण
मानवता ओर मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए की गई थी काशी विद्यापीठ की स्थापना

वाराणसी। प्रदेश की उच्च विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने कहा कि नई शिक्षा नीति युवाओं की ऊर्जा को आगे बढ़ाने वाला होगा। इसका प्रारूप भी बनकर लगभग तैयार है। नई शिक्षा नीति में इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया है कि शिक्षा और ज्ञान व्यवसायीकरण की भेंट न चढ़े। वह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ अवसर पर सोमवार को मुख्य अतिथि थीं।
गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित ‘विद्यापीठ की गौरवशाली यात्रा : एक झलक’ विषयक समारोह को संबोधित करती हुर्इं राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने कहा कि नई शिक्षा नीति जल्द ही आपके सामने मौजूद होगी। इसमें स्नातक करने वाले छात्रों को अंतिम छह माह तक व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया है ताकि युवाओं को कौशल विकास के जरिए रोजगार से जोड़ा जा सके। इस प्रकार नई शिक्षा नीति युवाओं को ज्ञान और विवेकी बनाने के साथ-साथ रोजगार से जोड़ने वाला भी होगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के मसौदे के लिए लगभग चार लाख से अधिक लोगों के सुझाव आए थे। उन सभी को ध्यान में रखते हए नई शिक्षा नीति में एक नए भारत की परिकल्पना की गई है। पर्यावरण, शिक्षा की गुणवत्ता, नए परिवेश के अनुरूप मानव व मानवता के साथ नए तकनीकी से जोड़ा जाय। इन तमाम वैश्विक चुनौतियों को भी ध्यान में रखा गया। 



उन्होंने कहा कि काशी विद्यापीठ की स्थापना मानवता व मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए की गई थी। वैश्विक स्तर पर आज भी यह चुनौती बनी हुई है। इस दिशा में विद्यापीठ को सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। स्वतंत्रता संग्राम के अतीत को समेटे हुए काशी विद्यापीठ अभी भी उन मूल्यों को जी रहा है। यहां के कुलगीत में ही हमारी परम्परा का मर्म समाहित है। मानव और मानवीयता का संरक्षण ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां के कुलपतियों, आचार्यों एवं विद्यार्थियों की गौरवशाली परम्परा रही है, जिसे अविरल बनाए रखने का उत्तरदायित्व विश्वविद्यालय पर है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय अतीत में सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है तथा वर्तमान में भी इसका सामाजिक सरोकारों में विशेष योगदान है। यह विश्वविद्यालय देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पूर्वांचल में कृषक एवं कृषि को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान संकाय की स्थापना की गई है। विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय  को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए शासकीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा दिलाने के लिए शासन से सहयोग का अनुरोध किया।  



शताब्दी समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्रोत महात्मा गांधी व संस्थापक राष्ट्ररत्न शिव प्रसाद गुप्त के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हुआ। इसके उपरांत मंगलाचरण संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डा. दिनेश चंद्र शुक्ल ने किया। कुलगीत मंच कला विभाग की छात्राओं ने प्रस्तुत किया। स्वागत करते हुए कुलसचिव डा. साहब लाल मौर्य ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डा. बंशीधर पांडेय ने विद्यापीठ की गौरवशाली परंपरा का बखान किया। संचालन डा. दुर्गेश उपाध्याय और धन्यवाद वित्त अधिकारी राधेश्याम ने दिया। इसके पूर्व राष्ट्रीय सेवायोजना के समन्वयक डा. केके सिंह समेत समस्त अधिकारियों के नेतृत्व में सैकड़ों स्वयंसेवकों के साथ प्रभात फेरी निकाली गई। कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी की प्रतिमा पर लगे छतरी का अनावरण किया। समारोह में जननायक विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह, कुलानुशासक प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी, प्रो. आरपी सिंह, डा. विनोद कुमार सिंह, प्रो. सभाजीत सिंह यादव, प्रो. मंजुला चतुर्वेदी, डा. राहुल गुप्ता, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. अरुण कुमार शर्मा, डा. रमेश सिंह, प्रो. सुधीर शुक्ला के अलावा काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।


 


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