‘मानस अक्षयवट’ तले मोरारी बापू के मुखारबिंद से रामकथा सुन विभोर हुए श्रध्दालु, बापू बोले, अक्षयवट का पत्ता-पत्ता चौपाइयां


राम कथा ‘मानस अक्षयवट' का भव्य आगाज

जनसंदेश न्यूज़
प्रयागराज। यमुना का किनारा... अक्षयवट की छाया और राम नाम की गूंज और राम की भक्ति में डूबे श्रद्धालु। हर तरफ राम का नाम...आंखे बंद ...हाथ उठाए हर भक्त ऐसे भक्ति में लीन था मानों साक्षात राम इस पावन धरा पर उतर आए हो। आंखे नम और मुख पर प्रभु के नाम का यह अद्भुत नजारा था संत कृपा सनातन संस्थान, नाथद्वारा की ओर से आयोजित ‘मानस अक्षयवट’ की कथा के पहले दिन शनिवार का। कथा मर्मज्ञ विख्यात कथा वाचक मोरारी बापू ने जब व्यासपीठ से अपने श्रीमुख से जब राम कथा का आगाज किया तो मानों एक दम से समय रुक गया हो। 
यमुना का घाट भी मानों कथा सुनने के लिए लालायित हो। ऐसा भक्तिमय माहौल सब तरफ राम का ही नाम। मानस अक्षय वट राम कथा का शुभारंभ कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने रामचरितमानस की चौपाइयों से किया। बापू ने रामचरितमानस के बाल कांड और अयोध्या कांड से मानस अक्षयवट कथा की चौपाइयों का वंदन किया। बापू ने बताया कि इनमें पहली दो चौपाइयां बालकाण्ड से ली गई है, जिसमें गोस्वामी तुलसीदास ने ऋषि भारद्वाज के आश्रम का वर्णन किया है। दूसरी पंक्ति अयोध्याकांड से ली गई है, जिसमें तुलसीदास ने प्रयागराज का वर्णन किया है।



‘मानस अक्षयवट’ विशिष्ट कथा, अक्षयवट प्रधान श्रोता
कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कथा शुरू करने से पूर्व व्यासपीठ से अक्षयवट को नमन करते हुए कहा कि प्रयागराज में हुई अन्य कथाओं में यह कथा विशिष्ट कथा है। व्यासपीठ से अक्षयवट दिख रहा है, अक्षयवट की यह पहली कथा है। उन्होंने इस कथा को ‘मानस अक्षयवट’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि अक्षयवट का पत्ता-पत्ता चौपाइयां है, उसे मैं पढूं, उसी को मैं सुनाऊं और यमुना जी उसकी साक्षी बने। बापू ने कहा कि इस कथा का प्रधान श्रोता अक्षयवट है। वह अक्षयवट जो अनादिकाल से अपनी सनातनी जड़े डालकर बैठा है। इसे विदेशी शासकों ने कई बार खत्म करने की कोशिश की, लेकिन यह अक्षय रहा।
युवाओं का किया मार्गदर्शन, दिए चार संदेश
मानस अक्षयवट कथा श्रवण करने वालों में युवाओं की भी भागीदारी रही। इस दौरान बापू ने युवाओं के नाम चार संदेश देकर उनका मार्गदर्शन किया।
वृक्ष में होता है भगवान का वास, हर देव का अपना वृक्ष
मोरारी बापू ने कहा कि हर वृक्ष में भगवान का वास होता है, हर वृक्ष में भगवान रहते हैं और हर भगवान का अपना वृक्ष है। उन्होंने कहा कि वटवृक्ष में सदैव शिवजी का वास होता है। पीपल विष्णु का वृक्ष है। उन्होंने कहा कि मानस के सभी सौपान में वटवृक्ष के दर्शन होंगे। 
भाव और प्रेम में होता है फर्क
मोरारी बापू ने कहा कि भाव और प्रेम में फर्क होता है। भाव अखण्ड होता है लेकिन अनंत नहीं। लेकिन प्रेम एक ऐसी चीज़ है जो अखण्ड भी है और अनन्त भी है। 
शंकराचार्य से दान में मिली पांच देवों की वंदना
बापू ने कहा कि हमें शंकराचार्य से पांच देवों की वंदना दान में मिली है। जिसे बाद में तुलसीदास ने भी अपनी रचनाओं में शामिल किया है। इसमें गणेश, गौरी, सूर्य, विष्णु और शिव शामिल है। इनमें भी शिव सभी का कल्याण करने वाले, जिसकी व्यापक दृष्टि टूटे नहीं वो विष्णु, जो प्रकाश में जीने का संकल्प करे वो सूर्य, श्रद्धा खंडित न होने पर गौरी और जिसका विवेक न छूटे वो गणेश है। बापू कहते है कि इनकी वन्दना न हो तो गुरु की वंदना कर लेना। तुलसीदास जी ने अपनी चौपाइयों में गुरु की वंदना की है।



कथा में पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य 
मोरारी बापू की राम कथा में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी पहुँचे। उन्होंने श्रद्धालुओं का उत्तरप्रदेश और प्रयागराज आने पर आभार जताया। साथ ही कहा कि राम जन्मभूमि की लड़ाई में राम जीते, अब राम टेंट में नहीं, ठाट में रहेंगे।
सतुआ बाबा सहित अन्य लोग रहे मौजूद
‘मानस अक्षयवट’ कथा अवसर पर मदन पालीवाल, रविन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, प्रकाश पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल,  सतुआ बाबा सहित बड़ी संख्या में संत कृपा सनातन संस्थान से स्वयंसेवक व श्रद्धालु मौजूद रहे। 
उमड़े राम भक्त, राम नाम से सज गया दरबार
श्रीराम कथा मर्मज्ञ और विख्यात कथा वाचक मोरारी बापू की राम कथा के पहले दिन पूरा पांडाल राम नाम से गूंज गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों यहां राम नाम का दरबार लगा हो। बापू के मुख से रामचरितमानस की चौपाइयां और कथा सुनने के लिए प्रथम दिन हजारों की संख्या में भक्त पधारे। पूरा पांडाल प्रभु भक्तों से भर गया।
अक्षयवट रहा आकर्षण का केंद्र
पहले दिन की कथा शाम 4 बजे शुरू हुई। भक्तजन कथा सुनने का समय शुरू होने से पूर्व कथा स्थल के पांडाल, यमुना किनारे समय व्यतीत करते दिखे। भक्तजनों में बापू की कथा सुनने के लिए लालायित नज़र आए। भक्तजन बापू की पुरानी कथाओं के बारे में चर्चा करते दिखे। साथ ही भव्य आयोजन को लेकर की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते नज़र आए। भक्तजन खास तौर व्यासपीठ पर बनाए गए अक्षयवट की प्रशंसा करते नहीं थके।  
राष्ट्रभक्ति का भी दिखा संगम, मुख्यद्वार पर लहराया तिरंगा
जगविख्यात मानस कथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू की कथा के लिए जर्मन हैंडर स्टाइल पर बने वाले भव्य पंडाल के अलावा हर कॉटेज की दीवारों पर तरह-तरह की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चित्रकृतियों देश-दुनिया से आने वाले रामकथा प्रेमियों को खूब लुभाया। ज्ञान की गहरी जड़ों के रूप में मानस अक्षयवट की कथा पांडाल के मुख्य द्वार पर राष्ट्र ध्वज  तिरंगा फहराया गया।


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