गोवंशों की मौत की जमीन बना जलनिगम परिसर, अमौली में कैद छुट्टा पशुओं की मौत का सिलसिला जारी


भूखे व प्यासे तड़प कर दम तोड़ने का सिलसिला है जारी


कैद में रखे निराश्रित गोवंशों की हालत हो रही है खराब


देखभाल को लगाए गये सफाईकर्मियों ने मोड़ लिया मुंह


जनसंदेश न्यूज
चिरईगांव। स्थानीय विकास खंड क्षेत्र के अमौली स्थित जलनिगम परिसर गोवंशों की मौत की जमीन बन चुकी है। यहां कैद छुट्टा पशु भूख और प्यास से दम तोड़ रहे हैं। उनके लिए चारे का इंतजाम करने में अफसर न सिर्फ सुस्ती दिखा रहे हैं बल्कि कागजी कोरम में ही जुटे हुए हैं। फलस्वरूप योगी सरकार में गोवंशों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बीते एक माह से अमौली (सिरिस्ती) स्थित जलनिगम पानी टंकी परिसर में आवारा पशुओं को कैद कर रखा गया है। क्योंकि उनके लिए अबतक उपलब्ध किसी भी गोवंश आश्रय स्थल में जगह नहीं है। ग्राम प्रधान परिवार और गांव के कुछ लोगों की ओर से अपने-अपने स्तर पर इन पशुओं को चारे के तौर पर पुआल दिया जाता रहा। लेकिन अबतक किसी प्रकार की सरकारी मदद न मिलने के चलते उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिये हैं। बीते शुक्रवार को इस ‘कैदखाने’ में एक पशु ने भूख-प्यास के तड़प कर जहां दम तोड़ दिया वहीं, शनिवार को एक और गोवंश की सांसें टूट गईं।
इस परिसर में रखे गये आवारा पशुओं की देखभाल के लिए लगाये गये सफाईकर्मियों ने भी अफसरों की उदासीनता के चलते यहां से मुंह मोड़ लिया है। वह सफाईकर्मी अब इन पशुओं की खोजखबर भी नहीं ले रहे हैं। इधर बीते लगभग दस दिनों से यह पशुओं को जल निगम की बाउंड्री के भीतर अपनी भूख मिटाने के लिए एक तिनका भी नसीब नहीं हो रहा है। जिससे यह बेजुबान गोवंश तड़प-तड़प कर मर रही हैं। गत चार दिनों से यहां पांच पशुओं की मौत हो चुकी है। शनिवार को छठे गोवंश ने भी दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पशु चिकित्सक डॉ. आरए चौधरी ने पहुंचकर उसका पोस्टमार्टम किया। उन्होंने आशंका जतायी कि यदि तत्काल चारे की व्यवस्था नहीं हुई तो इन गोवंशों के मौत का क्रम रोकना मुश्किल होगा।
नियम से बंधे बीडीओ!
सिरिस्ती की प्रधान कृष्णा सिंह शनिवार को बीडीओ चिरईगांव विजय कुमार अस्थाना से मिलीं। उन्होंने अमौली में कैद गोवंशों के लिए चारे की लिखित रूप से मांग की। दूसरी ओर, श्री अस्थाना ने बताया कि इसके लिए ग्राम प्रधान और सचिव का संयुक्त खाता खुलवाने के लिए कहा गया है। जितना जल्दी खाता खुलेगा चारा के लिए धनराशि आवंटन उतनी ही जल्दी संभव है। सरकारी पैसा रिलीज करने में तमामा नियम व शर्तों का पालन करना पड़ता है।


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