भगवान श्रीकृष्ण के पुत्रों ने ऋषि-मुनियों का किया अपमान, श्राप से हुआ यदुवंशियों का विनाश


ज्ञान यज्ञ महोत्सव में व्यास जी ने सुनाई भागवत कथा

जनसंदेश न्यूज़
दुबहर/बलिया। क्षेत्र के ग्राम पंचायत अखार में हो रहे ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दौरान शुक्रवार की देर शाम श्रीमद् भागवत कथा का प्रवचन करते हुए श्री लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज ने कहा कि अपना बुद्धि विवेक और आचरण शुद्ध करने के लिए सत्संग का सहारा लेना चाहिए। इसलिए जीवन में अगर समय मिले तो सत्संग में जरूर जाना चाहिए। 



उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण और प्रभु को पाने की इच्छा गृहस्थ आश्रम में रहकर भी किया जा सकता है। इसके लिए कोई जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को वैराग्य धारण कर गेरूवा पहनकर दाढ़ी मूछ बढ़ाकर रहा जाए। अपना व्यवहार करते हुए अपनी संपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी प्रभु के कृपा का पात्र बना जा सकता है। मानव को हमेशा यह ख्याल रखना चाहिए की मानव को अपने मन वचन कर्म से किसी को आघात ना लगे। ऐसा व्यहार करना चाहिए, संतों का चरित्र यही सिखाता है। 
उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों पर निवास करने से व्यक्ति पूर्णतया पवित्र हो जाता है। उसके मन बुद्धि विवेक में परिवर्तन आने लगता है और जिसके मन बुद्धि विवेक में परिवर्तन हो जाए उसका आचरण स्वतः ही अच्छा होने लगता है। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण के पुत्रों द्वारा ऋषि-मुनियों के अपमान तथा उनसे मिले श्राप जिसके कारण यदुवंशियों का विनाश हुआ। इसको विस्तार से सुनाया। 



इस मौके पर मुख्य रूप से संत श्रीधर चौबे, शशिकांत सिंह, सुनील सिंह, अरुण सिंह, जय सिंह, पिंटू सिंह, ध्रुव सिंह, कमलेश सिंह, शिवजी पाठक, अक्षैबर पाण्डेय, हैप्पी तिवारी, डॉ गणेश पाठक, दीपक सिंह, लकी सिंह, सुनील मिश्र, आकाश गिरी, बुढा सिंह, चन्द्र भूषण पाठक, जवाहर पाठक, जवाहिर जायसवाल, वीरेंद्र नाथ चौबे, कमला सिंह, गोगा पाठक, ओमजी सिंह, सनी सिंह, सन्तोष सिंह टुनटुन ,गोलू, नीरज, गप्पू आदि लोग रहे।


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