भारी हंगामे के बीच दोबारा टली जिला पंचायत की बैठक


चार साल से काम नहीं और लिस्ट पढ़कर दे रहे गवाही


कार्यों को लेकर मुख्य विकास अधिकारी व अध्यक्ष को दिखाया आईना


विकास कार्य आरंभ न होने का आरोप लगाते हुए अड़ गये मेंबर


कहा: स्थलीय कार्य के नाम पर सिर्फ तस्वीर खींचकर भेजी दी


ठप कार्यों को लेकर पीएम के आगमन पर धरना देने के दिये संकेत


अभियंताओं पर लगाया सीडीओ-अध्यक्ष को गुमराह करने का आरोप


मीटिंग को करार दिया नियम विरुद्ध, मुविअ और अध्यक्ष हो गये निरुत्तर

जनसंदेश न्यूज
वाराणसी। आगामी वित्तीय वर्ष के विकास कार्यों की कार्ययोजना व बजट तय करने के लिए जिला पंचायत की दोबारा रविवार को बुलायी गयी बैठक पुनः भारी हंगामे के बीच टल गयी। सदस्यों ने मीटिंग को नियम विरुद्ध करार दिया। साथ ही बीते वित्तीय वर्ष का विकास कार्य आरंभ होने तक बैठक में न शामिल होने की बात दोहरायी। वहीं, महकमों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये। सदस्यों के आरोपों का कोई जवाब न तो जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के पास था और न ही सीडीओ मधुसूदन हुल्गी एवं विभाग के अपर मुख्य अधिकारी राजेंद्र प्रसाद के पास।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला पंचायत सभागार में रविवार को अपराह्न तीन बजे से यह मीटिंग थी। लगभग 29 मिनट चली इस मीटिंग में सबसे पहले सदस्य संजय मिश्र ने कहा कि क्षेत्र में स्वीकृत कार्य यदि शुरु नहीं होते हैं तो बैठक न की जाय। मीटिंग तब हो जब ठेकेदार कार्य आरंभ करें। एक अन्य सदस्य ने बीते 31 जनवरी को स्थगित हुई बैठक की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से वादा खिलाफी हो रही है।
संजय मिश्र ने विभाग की नियमावली लहराते हुए ध्यान दिलाया कि जिपं की स्थगित बैठक दूसरी बार बुलाने के लिए कम से कम पांच दिन का अंतराल जरूरी है। उसके बावजूद सिर्फ दो दिन के भीतर बुलायी गयी यह मीटिंग नियम विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि महकमे के अधिकारी व कर्मचारी सीडीओ और अध्यक्ष को गुमराह एवं भ्रमित कर रहे हैं। इस पर सीडीओ श्री हुल्गी ने दावा किया कि प्रत्येक सदस्य के क्षेत्र में एक-एक कार्य आरंभ कराये जा चुके हैं।
मुख्य विकास अधिकारी के दावे को आईना दिखाते हुए एक सदस्य ने आरोप लगाया कि जिपं के अफसर-कर्मचारियों मौके पर महज किसी व्यक्ति की फोटो खींचकर उसे भेजते हुए काम शुरु कराने का झूठा संदेश दिया है। सदस्य ओमप्रकाश सिंह उर्फ खंजाटी सिंह ने कहा कि एक-डेढ़ साल पहले तत्कालीन सीडीओ और विभाग के स्टाफ क्षेत्र में गये थे लेकिन उसके बाद से अबतक न तो कार्य आरंभ हुए और न ही कोई दौरा हुआ। कुल 48 सदस्यों के क्षेत्र में विकास कार्य तो दूर मौके पर अबतक निर्माण सामग्री तक नहीं गिरायी गयी है।
उन्होंने कहा कि सीडीओ खुद जाकर हकीकत देखें। सदस्यों के ऐसे सख्त तेवर से हतप्रभ सीडीओ और अध्यक्ष समेत अपर मुख्य अधिकारी को कोई जवाब नहीं सूझा। सदस्य अखिलेश यादव ने जिपं की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए अध्यक्ष से कहा कि आप न सिर्फ अध्यक्ष हैं बल्कि सत्ता पक्ष में भी हैं। आपके खाते में 62 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं उसके बावजूद विकास कार्यों की यह दुर्गती है। अधिकारियों व कर्मचारियों की ऐसी मनमानी का समर्थन मत कीजिए।
मीटिंग के दौरान जब श्री हुल्गी के निर्देश पर अभियंता ने कराये जा रहे कार्यों की सूची पढ़नी शुरु की तो एक सदस्य ने कहा कि चार साल से विकास कार्य ठप है और हम यह भी बता रहे हैं कि फिलहाल कोई काम शुरु नहीं हुआ तो आप सूची पढ़वाकर इसकी गवाही दिला रहे हैं जैसे हम गलत लोग हैं। क्या हमलोग झूठ बोल रहे हैं?
उसी दौरान सीडीओ ने जिला योजना की प्रस्तावित बैठक के लिए जिपं की इस बैठक को जरूरी बताया। जिस पर सदस्यों ने कहा कि जिला योजना में हम सदस्यों के प्रस्ताव मान्य नहीं होते। सीडीओ द्वारा जारी प्रस्तावों को भी नामंजूर किया जा चुका है तो जिला योजना को महत्व क्यों दें। इस मुद्दे पर कुछ महिला सदस्यों ने भी रोष व्यक्त किया। सदस्यों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिनों आने वाले हैं। उनके आगमन पर जिपं के ठप विकास कार्यों के विरोध में हमलोग धरने पर बैठेंगे। अंततरू अपराजिता ने एकबार फिर बैठक स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि अगली बैठक के लिए सूचना दी जाएगी। मीटिंग में सदस्य राजेश यादव, उमेश प्रधान, रवींद्र कालिया आदि ने भी अपनी बात कही।
अभियंताओं की संपत्ति की हो जांच
वाराणसी। शनिवार को हुई जिला पंचायत की बैठक के दौरान कुछ सदस्यों ने विभाग के अभियंताओं की आय और संपत्ति की जांच कराने की मांग की। यह मांग कई बार उठायी गयी। परियोजनाओं में सरकारी मशीनरी के लोगों को 32 फीसदी तक कमिशन मांगते हैं। इसीलिए काम शुरु नहीं हो पा रहे हैं। ठेकेदार भूखों मर रहे हैं। इस पर अध्यक्ष अपराजति सोनकर ने आपत्ति की तो सदस्य ने कहा कि हम सरकारी मशीनरी की बात कर रहे हैं न कि आपकी।
यह है बैठक का एजेंडा
गत कार्यवाही की पुष्टि पर विचार, वित्तीय वर्ष 2019-20 के पुनरीक्षित बजट के अनुमोदन पर विचार, वित्तीय वर्ष 2020-21 के मूल बजट के अनुमोदन पर विचार, वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्राप्त धनराशि के सापेक्ष कार्ययोजना पर विचार, जनपद में जिला योजना वर्ष 2020-21 के अनुमोदन पर विचार, जनप्रतिनिधियों व अन्य तय माध्यमों से प्राप्त प्रस्तावों को राज्य वित्त योजना में शामिल करने पर विचार, जिला स्तरीय अफसरों से उनके विभागों के बारे में चर्चा, अध्यक्ष की अनुमति से अन्य विषय।
भेजी सदस्य पति की फोटो
रविवार को अपराह्न जिला पंचायत की बैठक में प्रतिबंध के बावजूद कुछ महिला सदस्यों के पति भी उपस्थित थे। मीटिंग खत्म होने के बाद में एक सदस्य के पति ने पत्रकारों को बताया कि मेरे क्षेत्र में जिला पंचायत के कर्मचारी गये जरूर लेकिन मौके पर सदस्य के बजाय मेरी फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर सीडीओ को सेंड कर दिया। साथ ही कहा कि यहां जल्द ही विकास कार्य आरंभ करा दिये जाएंगे।
उठा सकते हैं सख्त कदम
उम्मीद जतायी जा रही है कि विकास कार्यों के मुद्दे पर शनिवार को दूसरी बार टली जिला पंचायत की बैठक को लेकर सीडीओ मधुसूदन हुल्गी संबंधित विभागों के जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त रवैया अपना सकते हैं। क्योंकि बीते 31 जनवरी की शाम को उन्होंने मीटिंग कर जो निर्देश दिये थे, उन पर कोई कार्य हुए ही नहीं। सदस्यों ने उसकी कलई रविवार की बैठक में खोलते हुए महकमे के रवैये का कच्चा चिट्ठा पेश कर दिया। वह मीटिंग खत्म होने के तुरंत बाद श्री हुल्गी ने जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के साथ बैठक की।


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