भगवान नाम संकीर्तन से असंभव को किया जा सकता है संभव-हरिहरानंद जी


भृगुआश्रम मंदिर में 51 दिवसीय संकीर्तन का हुआ शुभारंभ




बलिया। दुनिया मे भगवन्नाम से बड़ी कोई साधना नहीं है, भगवान नाम संकीर्तन की शक्ति से दुनिया के कोई भी असम्भव कार्य को सम्भव किया जा सकता है। उक्त उद्गार देश के महान संत श्री हरिहरानंद जी ने 51 दिवसीय संकीर्तन के शुभारम्भ के अवसर पर भृगुआश्रम मन्दिर में अपने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को साधना के लिए कोई विशेष साधन की जरूरत नही है। व्यक्ति जिस अवस्था में रहे उसी अवस्था मे ईश्वर का भजन-कीर्तन कर सकता है। भजन सदैव ही मंगलकारी होता है, इससे कभी अमंगल हो ही नही सकता।
श्री हरिहरानंद जी ने कहा कि व्यक्ति को नियमित और संकल्पित आराधना से दैहिक, दैविक और भौतिक सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि बलिया नगर में पिछले कई वर्षाे से शाश्वतखण्ड संकीर्तन मन्दिर और सार्वजनिक स्थलों पर तो चल रहा है परन्तु इसे और विस्तार करने की आवश्यकता है। नगर के हर घर-परिवारों में नियमित रूप से एक से ढाई घन्टे संकीर्तन-भजन होने चाहिए। 
51 दिवसीय संकीर्तन का शुभारम्भ पंच पंडितों के वैदिक मंत्रों के साथ संकल्प पूजा व 108 बार श्री हनुमान चालीसा के पाठ के साथ हुआ। इस अवसर पर काफी संख्या में यजमान परिवार, खप्पड़िया बाबा परिवार व स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। 
इस अवसर पर लालजी पांडेय, सुधीर मिश्र, यादवेंद्र उपाध्याय, मैनेजर यादव, अभिराम सिंह ‘दारा’, त्रिवेणी पांडेय, संजय सिंह, विनोद चौबे, महेश पांडेय, शैलेश सिंह, आनन्द द्विवेदी, बबलू श्रीवास्तव तथा श्याम नारायण मिश्र आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


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