अफसरों ने की उपेक्षा तो खुद ही संभाली कूंची और मंदिर की जर्जर दिवारों पर बिखेर दिया अपने हुनर का चटख रंग 


विष्णुपुरा काली मंदिर को संवारने में जुटा युवा कलाकार शुभम


फाइन आर्ट्स के छात्र ने मंदिर की दीवारों में उकेरा म्यूरल आर्ट


आस्था इस स्थल पर दूर-दराज के गांवों से जुटते हैं हजारों लोग

जनसंदेश न्यूज
चिरईगांव। स्थानीय विकास खंड के विष्णुपुरा गांव में प्राचीन काली मंदिर है। यहां के लोग ही नहीं दूर-दराज इलाकों के ग्रामीण भी विभिन्न अवसर पर इस मंदिर में मत्था टेकने आते हैं। हजारों लोगों की आस्था के इस केंद्र की जर्जर हो चुकी दीवारों की मरमम्त के लिए ग्रामीणों के कई स्तर पर गुहार लगायी लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। ध्यान दिया गांव के ही शुभम मिश्र ने। फाइन आटर््स के इस छात्र ने सरकारी मदद के बगैर खुद आगे बढ़कर न सिर्फ मंदिर की बाउंड्री का सुंदरीकरण करने की ठानी और अपने हुनर से दीवार की सूरत ही बदलकर एक मिसाल कायम की है। 
बनारस में शहर के तमाम इलाकों की दीवारों पर पेंट और म्यूरल के जरिये देश, राज्य और काशी की संस्कृति को उकेरा गया है। देशी-विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री इन चित्रों की ओर आकर्षित होते हैं। यह चित्र सभी का ध्यान खींचते हैं। चिरईगांव ब्लाक के विष्णुपुरा स्थित काली मंदिर की सरकारी स्तर पर उपेक्षा को देखते हुए शुभम ने अपनी कला के बल पर खुद ही पहल करने का फैसला लिया और नगर की दीवारों पर उकेरे गये चित्रों से प्रेरणा ली। 
कहते हैं हौसला बुलंद हो तो कठिन से कठिन राह की मंजिल तय करना मुश्किल नहीं होता। शुभम ने काली मंदिर की जर्जर हो चुकी दीवारों पर म्यूरल के माध्यम से अपना हुनर बड़े ही शानदार ढंग से पेश का सिलसिला शुरु किया है। अब इस मंदिर का बाहरी हिस्सा बेहद सुंदर दिखने लगा है। यह मंदिर पहले की तुलना में और भी मनोहारी हो चुका है। 
काली मंदिर से होकर गुजरने वाले लोगों की निगाहें बरबस ही इन दीवारों पर पड़ रही हैं। मंदिर के मुख्यद्वार पर दो सिंह को भी शुभम ने मूर्त रूप दिया। शुभम ने कहा कि यह मंदिर कई गांवों के लिए आस्था का केंद्र है। लोग यहां विभिन्न अनुष्ठान व संस्कार कराने के लिए आते रहते हैं। डाला छठ आदि के कार्यक्रम भी यहां होते हैं। मंदिर के निकट स्थित तालाब में घाट और सीढ़ियों का अभाव है। 
उन्होंने कहा कि मंदिर के सुंदरीकरण के लिए मेरे परिवार के सदस्यों सहित ग्रामीणों ने ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय तक गुहार लगायी लेकिन सकारात्मक पहल नहीं हुई। फलस्वरूप मैं अपनी कला के जरिये जितना कर सकता हूं, कर रहा हूं। यह युवा प्रतिभा मकबूल फिदा हुसैन को अपना अदर्श मानता है। किसान परिवार के शुभम छत्तीसगढ़ के इंद्रकला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में बीएफए अंतिम वर्ष के छात्र हैं।
 


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