बनारस से चली काशी महाकाल एक्सप्रेस की बर्थ संख्या 64 में ऐसा क्या है कि भड़के हुए है ओवैसी? पढ़े खबर.....


जनसंदेश न्यूज़
वाराणसी। देश के तीन ज्योर्तिलिंगों को जोड़ने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस में कोच संख्या पांच की सीट नंबर 64 को लेकर सियासत शुरू हो गई है। आल इंडिया मजलिस-ए-इंतेहादुल मुस्लिमिन (AIMIM) के प्रमुख असुदुद्दीन ओवैसी (Asududdin Owaisi) ने इस सीट को लेकर कड़ी आपत्ति जाहिर की। जिसके बाद यह सोशल मीडिया (Social Media) पर यह चर्चा का विषय बन गया कि आखिर इस एक्सप्रेस ट्रेन के सीट संख्या 64 में आखिर क्या है। 
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को वाराणसी से इंदौर के लिए काशी महाकाल एक्सप्रेस को हरी झंडी दे दी। जिसके बाद देश के तीन ज्योर्तिलिंगों को जोड़ने वाली यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ पड़ी। लेकिन इसको लेकर सियासत तब शुरू हुई, जब एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को काशी-महाकाल एक्सप्रेस में कोच संख्या पांच की सीट नंबर 64 से आपत्ति है।




ओवैसी ने काशी महाकाल एक्सप्रेस को लेकर सोमवार की सुबह ओवैसी ने तीन ट्वीट कर पीएमओ को संबोधित किया। वहीं, उन्होंने पोस्ट के साथ संविधान के एक पन्ने को भी शेयर कर ट्रेन में भगवान शिव को समर्पित एक बर्थ को मंदिर का रूप दिए जाने पर आपत्ति जाहिर की है।
काशी महाकाल एक्सप्रेस को इस शिवरात्रि भगवान शिव के भक्तों के लिए समर्पित की गई है। इस ट्रेन को शिव से जुड़े धार्मिक स्थलों से जोड़ने की वजह से पहली ट्रिप में ट्रेन में विशेष व्यवस्था की गई है कि कोई भी यात्री भगवान शिव को कोच संख्या पांच के सीट नंबर 64 पर आकर नमन कर सकता है। मतलब ट्रेन में की सीट संख्या 64 भगवान शंकर के नाम रिजर्व है। जिसको लेकर ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। 


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