अब बिहार के इन क्षेत्रों पर नेपाल ने ठोंका दावा, रोक दिया बांध का मरम्मत कार्य, एसएसबी जवानों से दुर्व्यवहार


जनसंदेश न्यूज़
बिहार। कोरोना वायरस, गलवान घाटी सहित कई अन्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही भारत सरकार के लिए नेपाल नई मुश्किलें पैदा करने का कार्य कर रहा है। एक तरफ लिपुलेख, कालापानी व लिंपियाधुरा के सीमा विवाद के बाद अब उसने बिहार में कुछ जमीन पर अपना दावा ठोका है। यहीं नहीं नेपाल ने वहां चल रहे बांध के मरम्मत कार्य को रोक दिया है।
सोमवार को दोनों देशों के बीच एक और विवाद खड़ा हो गया है। नेपाल ने बिहार के चंपारण क्षेत्र स्थित एक बांध की मरम्मत पर रोक लगाते हुए वहां के पांच सौ मीटर भूखंड पर अपना दावा किया है। यह बांध नेपाल से आने वाली लालबकेया नदी पर पहले से ही है। इस घटना के बाद नेपाल व भारत के संबंधों में और तल्खी आई है।
दरअसल बिहार के पूर्वी चंपारण के ढाका अनुमंडल स्थित बलुआ गुआबारी पंचायत के निकट लालबकेया नदी पर बांध की मरम्मत का कार्य चल रहा है। सोमवार को नेपाल ने बांध की जमीन को अपना बताते हुए उसे रोक दिया। नेपाल ने कहा कि यह बांध उसकी जमीन पर बनाया जा रहा है। नेपाल के विरोध के बाद बिहार के सिंचाई विभाग ने भारतीय क्षेत्र में काम रोक दिया है। पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने घटना की जानकारी नेपाल में भारतीय महावाणिज्य दूतावास सहित केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को दे दी है।
सिंचाई विभाग के इंजीनियर बबन सिंह जो कि बांध की मरम्मत करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लालबकेया नदी का पश्चिमी बांध 2017 में आयी बाढ़ से टूट गया था। इसकी मरम्मत पर नेपाल ने आपत्ति जताई, जिसके बाद काम रोक दिया गया। बांध बन जाए तो पूर्वी चंपारण जिले के ढाका और पताही में बाढ़ की रोकथाम करना संभव होगा। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का मानना है कि बांध के विवाद को नेपाली सशस्त्र सीमा प्रहरी व सीमा पार के नेपाली नागरिक उलझा रहे हैं। नेपाल के ग्रामीणों ने एसएसबी के साथ दुर्व्यवहार भी किया।


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