खुशखबरी: राशन की दुकानों पर सब्सिडी रेट में मिलेगीं सब्जियां!


नीति आयोग की सिफारिशों पर आज बजट में हो सकती है घोषणा


पीडीएस प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम


फिलहाल पहले चरण में बेचे जायेंगे आलू, प्याज और टमाटर



जनसंदेश न्यूज
वाराणसी। सरकार ने यदि नीति आयोग की सिफारिशें मान लीं तो फिर राशन की दुकानों से सब्सिडी रेट पर आलू, प्याज और टमाटर मिलेंगे। नीति आयोग ने सरकार को दी गयी एक रिपोर्ट में कहा है कि खाद्य महंगाई दर में उतार-चढ़ाव का असर गरीब लोगों पर न पड़े। इसके लिए बेहतर होगा कि पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में चावल, गेहूं, चीनी के साथ आलू, प्याज और टमाटर को भी शामिल कर लिया जाए। राशन की दुकानों से तय मात्रा में इसको सब्सिडी रेट पर गरीबों को दिया जाए। इससे आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में वृद्धि होने पर इसका असर गरीब तबके पर नहीं पड़ेगा। खाद्य विभाग सूत्रों की मानें तो इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संभवतः एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में घोषणा कर सकती है या फिर संकेत दे सकती है कि सरकार इस सिफारिश पर विचार कर रही है। 
बताते चले कि पिछले दिनों फुटकर बाजार में प्याज जहां 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिका तो वहीं आलू भी 30 रुपये प्रति किलो तक बोला गया। टमाटर का भाव भी 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आलू, प्याज और टमाटर का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है। इसके दामों में वृद्धि से आम आदमी पर सीधा प्रभाव पड़ता है। 
ऐसे में गरीब आदमी इससे काफी परेशान होता है। बेहतर होगा कि गरीब परिवार के लिए इन तीन उत्पादों को पीडीएस सिस्टम के तहत लाया जाए। नीति आयोग ने यह भी कहा है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई से निपटने का यह स्थायी उपाय है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। सूत्रों की मानें तो सरकार नीति आयोग के इस प्रस्ताव को लागू कर सकती है। इससे सरकार पर वित्तीय तौर पर कुछ बोझ तो पड़ेगा, लेकिन इससे उसे राजनीतिक मोर्चे पर काफी लाभ होगा। 
आर्थिक मंदी के इस दौर में सरकार महंगाई दर, खासतौर पर खाद्य उत्पादों की महंगाई को कोई मुद्दा नहीं बनने देना चाहती है। वह चाहती है कि खाद्य उत्पादों की कीमतें अगर बढ़ें भी तो गरीब तबके पर इसका ज्यादा असर न हो। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि आलू, प्याज और टमाटर को पीडीएस में शामिल करने में सबसे बड़ी समस्या राशन की दुकानों तक इनको पहुंचाना है। इसके लिए सरकार को नेटवर्क तैयार करना होगा। बहरहाल जो भी हो, अब देखना यह है कि नीति आयोग के इस सुझाव पर अमल करते हुए केंद्र सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे आम बजट में पेश करती है या नहीं?


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